Tuesday, July 7, 2009

शराब पीना देश भगति है

जी आप ने शीर्षक ठीक पडा है इस बात में कोई शक नही क्योकि आपने शराबी का सामने का रूप देखा है आप कभी उसके पीछे के रूप पर नही गये हो न ही समझने की कोसिस किहे पहली बात तो ये की शराब नही ख़राब यह महा ओस्धि है जब कोई बीमार हो जाता है तो कहा जाता है की कोई दवा दारू दी के नही /इस बात का अर्थ है किsआरी दवाई एक तरफ और दारू एक तरफ /आप सभी जानते अनेको दवाई शराब ही होती है जो बहुत स्वस्थ लाभ करती है फर्क इतना है के वह जडीबुटी कि होती है यह चीनी जैसे पदार्थ से बनती है यह तो विज्ञानं भी कहता है भरब पिने हाजमा ठीक रहता है खून के दोरे में लाभ पहुचता है जिससे दिल का डोरा पड़ने कि कम संभवना रहती है इसके पिने नीद आती है मानसिक संतुलन ठीक रहता है लाभ तो और भी है बीएस इस बात से आप समझ ही गये होगे कि ये नाफ्त्र करने कि वस्तु नही है
शराब पीना देश भगति कैसे है आप सभी जानते है सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स शराब से ही मिलता है एक्स्सेज ड्यूटी शराब पर सबसे ज्यादा है पहला फायदा तो ये है जब सरकार के पास टेक्स ज्यादा जाएगा तो तो देस्ग कि उन्नति होगी नई नई तकनीक आए गी देश उन्नति करेगा सरकार सब सीडी देगी सामान सस्ता मिलेगा जिस सरकार के पास पैसा होता है वह संपन देश होता है और दुनिया में सर उठा कर चल सकते है अब तो आप मन ही गये होगे कि शराब पीना देश कि उन्नति में कितना बडा योगदान करता है /
देश भगत वह होता है जो देश केलिए अपनी जान देते है क्या शरब पि कर लोग नही मरते मगर मरने से पहले लड़ना पड़ता है क्या शारबी नही लड़ते अरे लड़ते तो है जिसे आप हुर्दंग कहते है वाही तो लडाई है पहले शरब पि कर देश को सीधा लाभ पहुचाया फ़िर दंगा किया /दंगे को सुलझाने को कितना बडा तंत्र खड़ा किया जिसमे अनेको कर्मचारी लगाये गये जिनकी रोजी रोटी चली/ जिसमे थोड़े पड़े से अधिक पड़े लोगो को सेवा करने का अवसर मिला /ये क्या देश सेवा नही है /
देश का सैनिक अपने बीबी बच्चो की प्रवाह नही करता देश के लिए जान देदेता है आप बताये क्या शराब पिने वाला करता है /नही करता ना / अपने धन को बाज़ार में रखता है कालाधन नही रखता ज्यादा धन बाज़ार में होगा देश खुशहाल होगा इस प्रकार हम कह सकते है शराब पिने वाला देश रीड मजबूत कर ता है इस लिए हमकह सकते है शराब पीना देश भगती है (व्यंग )

Wednesday, July 1, 2009

धर्म/ अधर्म

विश्व में धर्म व् जाति कितना घिनोना है इसकी कल्पना भी नही की जा सकती और यह घिनोना पन सदियों से इन्सान के साथ आ रहा इस ju है इन दो बातो ने आज हमे इन्सान नही राक्ससबना दिया / धर्म कहता है बुरे काम मत करो किसी से इर्ष्या मत करो हम सब एक भगवन के पुत्र है , हम सब भाई भाई है

जरा सोच कर बताये / आप किसी भी धर्म के हो/ क्या आपके धर्म का किसी धर्म से भाई चारा है क्या आपके धर्म का कही कोई दुसरे धर्म से कोई तनाव नही चल रहा क्या आपके आपके पडोस में दुसरे धर्म वालो अपने धर्म की तरह पटतीहै क्या आपका मन दुश्रे धर्म वाले को अपना मानता है और जब टोटल एक धर्मं अवलंबी होते है तबउनकी बातो में भाई चारा होता है क्या ? जरा खुले मन से अपने धर्म को मानते हुए सोचिए मेरे हिसाब से उतर दुसरे के प्रति एक तनाव जरुर होगा खुले मन से जिसे आप नही मानते /

धर्म को घिनोना क्यो कहता हु/ धर्म पहले था या इन्सान ? इसका सभी समझदारयही उतर देगे की इन्सान पहले, धर्म बाद में है इंसानों से ही धर्म बना है इस लिए इन्सान पहले है परन्तु आज धर्म के नाम पर कितना खून खराबा हो रहा है जिससे समाज में और ख़ुद ने तनाव हो क्या वः हमारा या समाज का हित है क्या हम शान्ति से जी पायेगे जब समाज ने तनाव होता या आप पर तनाव रहता है वहभी बदले का तो बताइए आप उन्नति की सोच सकते हो नही न इरसया में में सभी गर्त में ही गिरते है /

जीवन का एक ही लक्ष है आनन्द / क्या कोई इसे प्राप्त सकेगा ,नही ना जब सब कुछ होहे हुए आप को आनन्द नही मिला तो आपने जीवन में कुछ पत्राप्त नही किया / आप पहले इन्सान थे बाद मेधर्म था आपने इन्सनित्यत को त्याग कर धर्म को अपनाया है क्या वह वस्तु या सोच अपनानी चाहिए जिससे आप का और समाज का दोनों का बुरा हो रहा हो /


धर्म किसी एक की अमानत नही है अगर आप आस्था रखते है तो भगवन सभी का है परन्तु जब एक लडका या लडकी शादी करते है तो धर्म के ठेकेदार पुरी ताकत से अडंगा लगते है आए दिन आप ख़बर सुनते हो उन्हें क्या परेशानी होती है सब को अपनी जिन्दगी जीने का हक़ है जितने भी नाम से जुड़े धर्म हैजैसे हिंदू ,मुस्लिम ,क्रिचन आदि आदि उन्हें त्याग देना चाहिए जितने भी नाम से जुड़े धर्म है यह धर्म नही अधर्म है मेरा यह मन्ना है की यह संसार का ना भला किया है ना करेगे

निवेदन - तिप्न्नी जरुर लिखे ,आप अपना इ-मेल पता लिख सकते है जिससे आप से सीधा जुदा जा सकता है

Thursday, June 25, 2009

क्या भगवन रक्षा करते है ?

दुनिया के सभी धर्मो की एक मान्यता है कि उनका भगवान या अल्लाह या अन्य धर्मो में जो भी कहा जाता है वहउनकी रक्षा करता है वह उनकी सभी तरह से रक्षा करताहै चाहे वह सेहत से हो पैसे से हो या अन्य कैसी भी हो सभी से उनकी रक्षा करता है केवल unhi की रक्षा करता है जो उसके भगतहै जब किसी गोद या अल्लाह या किसी भगवन का कोई विशेष पूजा की जाती है बहुत लोग एक साथ आते है इससे धर्म को बहुत फायदा मिलता है यह हर वर्ष किया जाता है अपनी रक्षा के लिए भगत बहुत पूजा करते है
अब एक बात आती है जब भी कोई बड़ी पूजा होती है बहुत आदमी मर जाते है या दुश्मन मार देता है जब भगवान रक्षा करते है वह कैसे मार दिए जाते है भगत की रक्षा भगवान नही आदमी करते है कईधार्मिक स्थानों पर भगदर हो जाती वहा भगत मर जाते है घायल हो जाते है उनकी सहायता भगवन नही इन्सान ही करता है यह बात धर्म स्थल की ही नही पुरे संसार की है जब भी इन्सान पर विपति आई है इन्सान ने ही सहारा दिया है भगवन किसी को हाथ में डंडा देने या दवाई देने कभी नही आए / दूसरा पहलू ये है कि किसी भी देश में हो कोई भी धर्म हो / धर्म के काम के लिए सेना का आदमी क्यो लिया जाता हैमैकिसी के त्यौहार का नाम नही लेना चाहता । बसअपने या अपने किसी न किसी नजदीक किसी धर्म को देख लेना / आज के दोर में आतंक वादी किसी को भी निशाना बना सकते है उनके लिए सेना क्यो? भगवन क्यो नही/ क्या आपके भगवान रक्षा नही करते या आपको लगता है वह हमारी रक्षा नही कर सकते इस लिए सेना को खड़ा किया जाता है / कितनी छोटी सोच है आपकी भगती में अपने सवर्ग के लिए किसी जवान को बलि चडा देते हो किसी के सुख से आपको कोई अर्थ नही / यह स्वार्थ है भगती नही अगर आपका भगवन अल्लाह या मसीही आपकी रख्सा करता है तो किसी क्यो मरतु देते हो /सच तो ये है कि आप कि जान किसी इन्सान ने ही bachai /क्या भगवन ने baachai / आप kaise kh kahte ho bhagwan hamari rkhsa karte hai /
आप सभी धर्म भगत बताये क्या भगवान आप की रक्षा करते है आप किसी भी धर्म से क्यो न हो / पड़ कर जवाब जरूर लिखे / अपना इ-मेल पता भी दे सकते है ताकि मेआप से सीधा सम्पर्क कर सकू /

धन्यावाद ,

Saturday, June 13, 2009

सबके भगवान बडे व पुराने क्यो ?

आज विश्व में हजारो धर्म होगे सम्प्रदाय होगे सभी अलग भगवन की पूजा करते है

सभी अलग अलग है इस लिए मानव एक नही अनेक में बटगया है इस अनेकता में एक बात एक है वह है दुसरे धर्म को छोटा बता कर अपने धर्म को बडा बताना अच्छा बताना अपने को किसी भी तर्क से सबसे उचा बनाये रखना विश्व में जितने भी धर्म के प्रचारक है वह शभी यही कहते है हम उतम है हम ठीक है बाकि सब बकवास है हमारे साथ जुडो और दूसरा यह कहते है किहमारा जो भगवन है वह सबसे पुरातन है और सबसे पुरातन होने के कारण येही सबका मालिक है यही करता है ठीक इसी प्रकार दूसरा व् तीसरा या सभी धर्म कहते है /

अब जरा सोचिये क्या इस लोक के मालिक अनेको है और सभी अविनशी है नये और पुराने तो तभी होगे न जब सभी अविनाशी होगे/ इस प्रकार इस लोक पर अनेको धर्म और इस लोक को चलाने वाले अनेको भगवान है अगर आप भगवान में विश्वास रखते हे तो आप ये भी कहते होगे इस लोक का पालन करता एक है इसी प्रकार धर्म गुरु bhe यही कहता है /यदि एक ही है तो आप अपने को पुरातन किस प्रकार कहते हो अपने को उतम किस प्रकार कहते हो/ अगर सभी धर्म barabar है तो आप अपने धर्म के लिए प्रचार क्यो कर रहे हो दुसरो के धर्म में सामिल क्यो नही हो जाते /

मेरा धर्म गुरुओ से अनुरोध है आप बताये आपका भगवान बडा व् पुराना क्यो है कैसे है या कोए धर्म का जानने वाला हो अपने भगवान को दुसरो से छोटा बताये खुले मन से विचार रखे हो सके तो अपना इ -मेल पता जरुर लिखे जिससे आप से सीधे स्मपरक हो सके / सभी पाठको से अनुरोध है अपनी टिप्पणी जरुर लिखे /

Saturday, June 6, 2009

मूर्ति पूजा क्यो ?

में मूर्ति पूजा के बारे में जानना चाहता हु क्योकि इस विषय पर मेरा कोए विश्वास नही हे /आप सभी से अनुराध हे कि इस विषय के बारे में जो भी ज्ञान या तर्क रखते हो देने का कास्ट करे इस बारे में विस्तार से बताये आप किसी भी धर्म से सम्भन्ध रखते हो विश्व के किसी भी कोने से हो / मैयह समझता हु कि येही हमे ज्ञान से दूर ले जा रहा हे /धर्म से विमुख होने का कारण ऐसी पूजा हे इसी कारन हम सिख्सित होते हुए भी पाप कर्म कि तरफ बढ रहे हे पुरी दुनिया मै धर्म के नाम पर करोडो रूपये या पुरी दुनिया में तो अरबो अरबो खर्च होते हे मगर हम फिरभी हम नरक में जो रहे हेंयहाँ नरक से मेरा अर्थ समाज के विरूद्व कार्य से हें /इस सारा तंतरके बीच गलती बहुत हें मगर में आप से केवल मूर्ति पूजा पर ही बात करना चाहता हु इसको समाज में पुरी तरह लागु करना चाहिए या हटा देना चाहिय में आपसे आसा करुगा कि आप बिना किसी डर के अपने दिल के विचार रखे किसी के सुने या पडे हुए नही होने चाहिए पर्ति किरिय जरूर दे अपना इ मेल पता देगे तो आप से सीधा सम्पर्क केरे गे