Monday, May 16, 2011

एलोपैथी हटाओ बाबा पैथी लाओ

आज मानव को अनेको पारकर की बिमारिओ ने जकड रखा है उसके लिए अनेको हॉस्पिटल है और सरकार मानव को बीमारी से बचने के लिए अरबो रुपया खर्च करती है इस कारण आज मानव अनेको बिमारिओ ले मुक्त हो गया है और आप सभी जानते है कि एलोपैथ का हमारे जीवन में कितना महत्व है परन्तु आज के साइंस के युग में बाबा पैथी भी है जिसमे बाबा बिना दवाई के इलाज करते है जो आदमी इस में विस्वास रखते है बताए की यह पैथी ठीक है या गलत है जो बाबा पैथी को मानते है वह इसे सरू करते ही अलोपैथी की गोली छोड़ देता है / मेरी राय से सर्कार ने बाबा पैथी को लागु कर दे तो देश को कितना लाभ होगा अरबो पैसा बच जाएगा न हॉस्पिटल खोलने कि जरुरत बस हजारो का एक साथ इलाज हो जायेगा मंगाही कम हो जाएगी मुझे लगता है सरकार अंधी है जो एलोपेथ के नाम से आम आदमी को लूटे जारहे है बाबा पैथी एक गरीब समाज के लिए ठीक है / आप क्या कहते है टिपण्णी दे /

Friday, January 8, 2010

कपडे उतारती नारी

आज कल नारी पुरुष को निशाना बनती है वह नारी जो अपने को नारी पंगती मै अग्रणीय बताती है वह कहती है आदमी बल्त्कारी हो गया है आदमी ने नारी को असुरक्षित कर दिया है वह सडक पर गली में या कही भी अकेली नहीं निकल सकती और समाज व् कानून ने उसे बेचारी मानते हुए आदमी को दोसी करार दे दिया क्या आदमी इसका जिमेदार है मै मानता हु नहीं\ ताली एक हाथ से नहीं बजती \ जरा एक पहलू ये देखे आज समाज में अपने को पड़ी लिखी आधुनिक नारी क्या अपना पूरा शरीर डक कर चलती है नारी ने सकुल में कम कपडे पहने फिर कालजे में छोटे कपडे पहने जब गली या पार्टी में गई तो भी छोटे ही कपडे पहने उतने छोटे जितने वह पहन सकती है उनसे पूछे क्यों नहीं पहनती है पुरे कपडे \वह कहती है सुंदर लगने के लिए छोट कपडे पहनती हु \ जरा नारी बताये क्या कम कपड़ो में नारी सुंदर लगाती है\ मै मानता हु नहीं , गलत जवाब है \ जो नारी छोटे कपडे पहनती वह आकर्सन के लिए पहनती है सुंदर लगाने के लिए नहीं \दुल्हन को सुंदर कपडे पहनाकर बनाया जाता है उतार कर नहीं\ कपडे उतार कर आप जिस के लिए आकर्षित कर रही है अगर आदमी आकर्षित हो जाता है तो वह दोसी क्यों क्या नारी दोसी नहीं है
टिपण्णी के इंतजार में

Monday, November 23, 2009

नारी समानता नही चाहिए

आज विश्व में एक आवाज़ आ रही है कि नारी समानता होनी चाहिए सहमत नही हु आप सहमत हो सकते है समाज में नर व् नारी दोनों को रहना है दो सामान ताकत आराम से एक साथ नही रह सकती दोनों टकरती रहेगी जब तक एक हार न मानले यही हमारे समाज में होगा/ क्योकि जगत का नियम है कि रजा एक ही होता है जब कई राजा होगे तो अराजकता फ़ेलेगी यही हल नारी समानता आते ही ही होगा समाज समाज न रह कर एक आदमी का समाज रह जाएगा हार आदमी का अपनी सच के अनुसार समाज हो गा/ समानता आते ही कामवासना बेडेगी व् हिंसा होगी विश्व में नर काम प्रधान होता है जब नारी भी बराबर हो जाएगी तो काम अपने चरम पर पहुच जाएगा तलाक होगे व् कुवारी लडकियों को बचे होगे / जिन बच्चो के बिखरे परिवार होते है उनमे समाज के परती कोई मोह नही होता उनकी वर्ती हिंसात्मक होती है तो क्या आप विकरत समाज चाहो गे संतान जो भविष्य होती है अपने भविष्य को बिगड़ना चाहोगे क्या आप अपने समाज में हिंसा चाहते हो समाज में उपर लिखी बुराई ही नही सारी बुराई आएगी क्या आप चाहते है बुरा समाज / तो अब बताये क्या नारी समानता होनी चाहिए/ टिपणी के इंतजार में /

Tuesday, October 20, 2009

बहन भाई क्यो नही !

आज समाज विज्ञानदोनों ही बड़ी तेजी से बदलते जा रहे है पहले का सारा का सारा नजरिया बदलता जा रहा है खास कर समाज तो रीती रीतिरिवाज वह बिल्कुल बिल्कुल ही वह BILKUL HI बदल रहे है पुराने टूटते जा रही है हमारा धर्म तो पुराना है परन्तु उसका रिवाज अपनी चाहत के अनुसार बना रहे है इस बदलाव के कारण तो धर्म पर शक होने लगता है जिन सिदंतो से धर्म बना है वह पर्तिदिन गिरगिट की तरह बदलता है तो हम किस नियम को माने किस सीथिर सिदान्त को माने सदेव रहने वाला हमारा धर्म कोनसा है /

अब हम इसके सिदंतो या रिवाजो की बात करते है पुरी दुनिया माँ हर धर्म में बहन भाई का रिश्ता सबसे पवित्र मन जाता है कानून ये कहता है की कोई भी दो बालिग लड़का व् लड़की शादी कर सकते है यह तो मुझे मालूम नही की उस कानून में सहज बहन भाई शब्द पर्योग कर रखा है की नही / हा कानून धर्म के साथ बंधा हुआ नही है इस लिए वो लिख सकता है थोड़े आदमियो को छोड़ कर सारा विशव धार्मिक है धर्म ये कहता है की कोई भी कुआंरी लड़की हो वह बहन लगती है क्या आप किसी धर्म से जुड़े हो अगर जुड़े होतो क्या आप बहन भाई के इस सिदान्त को मानते हो अगर नही मानते तो अपने आप को किसी भी धर्म का मानने वाला मत कहिये आप धार्मिक है ही नही या आप किसी भी धर्म के नही हो /

आज कोई भी लड़का किसी भी लड़की का भाई नही बनना चाहता केवल सगी बहन तक ही या चाचा ताओ तक ही इस रिश्ते को मानता है बाकि शाभी लड़कियो को दोस्त मानता है क्यो ?यह बात लड़को पर ही नही लड़कियो पर भी लागु होती है क्यो ऐसा होरहा है क्यो नही बनना चाहते बहन भाई बनना / क्या दोस्त बनना जरुरी है क्या इसके पीछे कोई स्वार्थ छिपा है या आज की जरूरत है क्या आप बहन भाई बनना चाहोगे अगर नही तो क्यों/ क्या बहन भाई बनना गलत है यह रिश्ता धर्म से सम्बंधित है या नेतिकता से /आज के बाद आप क्या निश्चित करेगे दोस्त या बन भाई / टिपण्णी के इंतजार मे

Tuesday, September 1, 2009

धर्म पत्नी /पति

मैनेएक ब्लॉग पर पडा की धर्म पत्नी होती है धर्म पति क्यो नही होता / मारा कई लेखक भाई बहनों ने समझाने की कोसिस की परन्तु मेरे हिसाब से ठीक नही था /मैने डॉ। अधुरा के नाम से लिखा भी था जो बहुत थोड़ा था अब विस्तार से लिख रहा हु धर्म पत्नी व् पति लिखने की आदत मेरे हिसाब से हिंदू धर्म में ही है हिंदू वास्तविक रूप में भगवन व् उनकी पत्नी को ही पति पत्नी मानते है बाकि हम तो उनके बनाये धम्र के अनुसार ही पति पत्नी है अब इसका वेझानिक पहलु बताते है तो भाषा के विझान पर भी ठीक है पति का अर्थ है पालकअर्थात जो पालता है और पत्नी का अर्थ है जो पलती है /पत्नी को शक्ति भी कहा जाता है वास्तविक रूप में जो गुन हमारे अंदर सबसे शक्तिशाली है या जो गुन हमने विशेष से बडाया है वह हमारी पत्नी है हमारे और हमारी शक्ति के बिच में कोई नही होता न ही हम बहार से लाते है वह हमारी पत्नी है जो हम शादी करके लाते है उसे हम समाज से अपने धर्म के अनुसार लाते है और नियमो का पालन करते है धर्म अनुसार लेने व् पालने के कारणउसे धर्म पत्नी कहा जाता है यही बात पति पर लागु होती है / धर्म गर्न्थोमें गलत अर्थ लगाने से ही हमारे गरंथ अधर्म की पुस्तक बन गई है और हम अधर्मी बन गए है पुसतक पड़ते समय प्रत्यक्ष व् परोक्ष का ध्यान रख कर सही अर्थ लगिए बात ठीक रहेगी नही तो आज जेसे सवाल खड़े हो रहे है खड़े होते रहेगे और यही कारण धर्म विनाश का कारण है /
टिपणी जरुर लिखे , धन्यवाद/

Thursday, August 27, 2009

नारी नही बेचारी

आज तक पुरे विश्व मै नारी को बेव्हारी के रूप मै देखा जाता है उसी नजर से उस पर दया की जाति है / परन्तु नारी को जब पूछा जाता है तो वह पुरूष को बेचारी कहने को मना करती है और सना थोक कर कहती है की हम पुरुषों से किसी भी तरह कम नही है जब कही नारी समेलन हो रहा होतो वहा तो सुनने लायक बाते होती वहा तो समाज को पुरूष प्रधान बता कर बहुत ही कड़वा भाषण दिया जाता है जबकि आज तक जितना भी नारी उठान हुआ है उसमे पुरूष की पुरी भागी दरी रही है नारी इस बात को मानने को तयार नही पर यह सचाई है यह नही की मै पुरूष हु मै नारी उठान के विरूद्व नही हु /

परन्तु मुझे जोर का धका जब लगता है जब नारी के लिए सरकार की तरफ से दया के रूप मै कोई विशेस छुट दी जाति है या कानून मै कोई नरमी दी जाती है जैसे बस मै खड़ी नारी को सिट देदेना या किसी कतारमै पहले जगह दे देना या अबला समझ कर दया करना कितने छोटी सोच के है वो लोग जो नारी को दया का पात्र मानते है आज नारी किस पद पर नही है मै तो यही कहुगा की नारी पर किसी प्रकार की दया नाकि जाए /मै तो ये चाहता हु की इसे भी देश की रक्षा के लिए सीमा पर पर तनत कर देना चाहिएजेसे पुरूष पर कमाने का दैएत्व है उसी परकार नारी का भी होना चहिये नाकि ये की नारी कुछ करे तो शाबाशी करे तो ये कह कर छोड़ दो की ये तो नारी है घर भी रह सकती है नारी बेचारी कहना व् बेचारी समझ कर सहायता करना नारी का अपमान करना है क्योकि नारी नही बेचारी /

टिप्पणी लिखे , धन्यवाद /



Tuesday, July 21, 2009

बलत्कार एक हथियार ?

आज मिडिया में बलत्कार छाया हुआ है हर रोज ख़बर आती है जिसमे मारने व् बलत्कार की बराबर की ख़बर होती है बलत्कार की खबर में छोटी बच्ची से लेकर बड़ी ओरत तक होती है और बलत्कार करनेवाले किसी भी उम्र के हो सकते है / क्या, धर्म के अनुसार कलयुग आगया है इस लिए ऐसा कृत्य हो रहा है बलात्कार के केश को देखने के बाद एक बात दिखाई देती है किदोष कानून कि नजरो में केवल पुरूष का ही होता है क्या आपकी नज़र में दोसकेवल आदमी काही होता है क्या तली एक हाथ से बजती है ? हा जहा पर्सनआता है बच्ची व् बेसहारा व् लाचार की वहा बात ठीक है आज के समाज में युवा नारी युवा नरो का शिकार होती है यहाँ ग़लत मामला बनता है यहाँ पुरूष को ही दोसी माना जाता है जब की नारी व् कानून दोनों कहते है की नारी पुरूष से काही भी कम नही है वह पुरूष के बराबर हर मानले में है परन्तु जब बलात्कार का मामला आता है तो यहाँ नारी को कमजोर समझ कर आदमी को दोसी माना जाता है क्यो ? एक तरफ तो नारी को १८ साल से उपर होने के बाद उसे अपने बारे हर निर्णय लेने का अधिकार है कानून उसे स्वंम का स्वामी मानती है परन्तु बलत्कार में नारी कहती है की मुझे बहला फुसला कर ले जाया गया /मारने की धमकी दी जबकि मारने वाले के पास कोई हथियार नही था अगर नारी इतनी कमजोर है की मात्र खाने के डर से ही इतना झुक जाती है तो बारबार होने का दावा व् अधिकार क्यो जताती है कई बार कहती है मेरे घर में घुस कर जबर जास्ती की / ये सारे बहाने है अगर बात खुलती है तो बलात्कार का नामले कर पुरूष को बलि का बकरा बनादो / आप सभी जो न्याय विध है या आयोग में उचे पदों पर बेठे है खुले मन से सोच की क्या एक आदमी अपनी पत्नी की सहमती के बिना सम्बन्ध बना सकता है मैतो ये मानता हु नही / अगर आप को सकोच है तो जर अजमाकर देखो /दूसरी नारी की तो बात ही और है /बच्चियो विकलांग याकोई भी मज़बूरी को छोड़ कर केवल पुरे बलात कर के आंकडो मै केवल २ से ३पर्तिशत Hइ ठीक होते है /
इस कानून की आड़ में नारी ही पुरूष के स्त बलात्कार कर रही है जब तक आदमी या बात ठीक चलती है तो मामला ठीक है वरना बलत्कार / आज नारी जानती है जब तक अयास्शइ की जातो है करो जब खतरा आए पुरूष को बलि चदा दो इस लिए नारी इस काम को खुल कर कररही है कई बार तो यह बात भी सामने आई है की शादी का झासा दे कर महीनो बलत्कार किया /इस बात एक बात तो है की वः नारी विवह से पहले इस कम को वः ठीक मानती थी और जब बिगरी तो व्ही काम बलत्कार हो गया जब नारी दुशमन से लड़ने की ताल ठोकती है तो यहाँ अपने को कजोर बता कर डॉस पल्ला झाड़ रही है आप सभी पाठको से अनुरोध की आप बताये की आज नारी ने बलत्कार को हथ्यार बनाया की नही / इस बलत्कार के कानून में सुधर होना चाहिए की नही / और परुष वर्ग से अपील है की वः भी नारी के विरूद्व में बलात्कार के मुकदमे दायर करे ताकि आप अपनी गिरती हुई शाख को बचा सखो /
टिपण्णी के इंतजार में /
धन्यवाद /
ही